पाँच शेर - भाग ३

Monday, November 6, 2006 |

मैने बांसुरी बजाना शुरू कर दिया है
पता चला जब से उसका नाम राधा है

गुस्से में आकर दीवार पे दे मारा
पहले दिल में दर्द था अब हाथ में है

हममे कुछ कमियाँ आज भी कायम है
क्योंकि हर दोस्त मंझधार में छोड़ गया

क्या हुआ गर आजकल लिखने लगा हूँ
तन्हाई को फिर भी हमेशा याद रखता हूँ

वक्त का हमे तकाज़ा ना रहा
वरना 'वो पन्ना' इतिहास न होता

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