कल धर रूप प्रभू कृष्ण का
सागर भाई अचानक प्रकट हुए
ज्यों दिये ज्ञान प्रभू अर्जून को
वैसा ज्ञान दे हमको कृतार्थ किये
सागर भाई के विराट रूप को
मैं चरण-कमल वंदन करता हूँ
ज्ञान अनमोल मिला जो मुझको
अब आपके सम्मुख रखता हूँ -
कविता पढ़ा-पढ़ाकर अपनी
पहले मुझको व्यथित किये
मुझे हँसाओ कहकर फिर
भ्राताजनों के अंगुली किये
कितने पाप गिनाऊँ तुमको
क्या कुछ नहीं तुम किये हो?
भुवनेशजी थे इंसान कलतलक
उनकों तुम मंत्रीभार दिये हो
परीक्षाभार पहले से था सर पर
फिर भी प्रतिकजी से लिखवाया
लगावाये चक्कर विदेशों के
पर सबने ही अंगुठा दिखलाया
था खुब विश्वास बन्धुजनों पर
आपने बंद मुट्ठी को खुलवाया
फिर यह कड़वा अनुभव सारा
कह-कहकर चिट्ठे पे लिखवाया
मुझको भी फिर झांसे में लेकर
गृहस्थ जीवन का राज उगलवाया
जीवन संगनी से पहली बार
बिना किसी हथियार पिटवाया
इतने में कहाँ तुम्हे चैन मिला
संजय, शुएब को भी ललचाया
रोये गिड़गिड़ाये दोनों बेचारे
फिर हाथ जोड़कर पिंड छुड़ाया
आंसू छलक गये फ़ुरसतियाजी के
पर तुमको ना नयन-नीर हुआ
तुम तो चल दिये हो धुन सवार
चाहे हँसी-हँसी में उनको पीड़ हुआ
यह सबकुछ जो तुमने किया कहो
क्या अब भी तुमको एहसास हुआ?
"सागर भाई को हँसाना है" कहकर
कैसे भ्राताजनों को परेशान किया?
हतोत्साहित करना नहीं मकसद मेरा
मैं तो प्रेम-पुष्प बिखराना चाहता हूँ
जब छू लो तुम बढ़कर अम्बर को
मैं उस पल में मुस्कुराना चाहता हूँ
दर्द मिलेंगा हर दिल में तुमको
काव्यमय चित्र ना बनाया करो
गर काव्य ही लिखना चाहो तो
तुकतुकजी सा कुछ लिखा करो
बहुत बहा चूके हो गम के आंसू
अब लेखनी में ऐसी जान भरो
बरसो से भूला जो हँसना-हँसाना
चहरे पर उसके मुस्कान धरो
भले रच दो महाकाव्य गम में
दर्द दिलों का न इससे मिटेगा
क्या बसेगा गम वहाँ तुम्ही बताओ?
जब कहीं हँसी का गुब्बार फटेगा
सागर ज्ञान दौड़ रहा है नशों में
कैसे?, यह हम जल्द ही बतलायेंगे
अब वो दिन मित्रों दूर नहीं जब
आप मेरे काव्य पर ठहाका लगायेंगे
सागर भाई को हँसाना है
Sunday, December 17, 2006 |
Posted by
गिरिराज जोशी
Labels:
कविताएँ,
हास्य-व्यंग्य
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Labels
- fun (1)
- google (1)
- google translator (1)
- poem (1)
- translator (1)
- अन्य (18)
- ई-पत्र् (10)
- कविताएँ (31)
- कहानी (1)
- कुंडलियाँ (1)
- क्षणिकाएँ (1)
- चर्चा (5)
- डायरी (3)
- तकनीकी (4)
- ताज़ा जानकारी (2)
- ब्लॉगर (2)
- शेर-ओ-शायरी (3)
- संदेश (13)
- समीक्षाएँ (4)
- सूचना (2)
- हाइकु (3)
- हास्य-व्यंग्य (16)
RSS Feed

0 comments:
Post a Comment