आजकल गपशप पर "डिस्कशन" चल रहा है, पंकज भाई ने सिनेमा वालो की तर्ज पर चार लाईनों में नोमिनेशन क्या माँगा, "डिस्कशन" शुरू हो गया। गुरूदेव कुछ ज्यादा उतावले नज़र आए और हँसी-हँसी में वोट भी माँग लिया। खेर जो भी हो आजकल गपशप पर हिन्दी के महान से लेकर महानतम चिट्ठाकार (अब जो हिन्दी लिखता है वो महान तो है ही :), नोट : स्माईली लगा दी गई है, कृपया अन्यथा ना लें) कुछ इस प्रकार मिलते हैं -
नमस्कार, कैसे हैं?
अच्छा हूँ, आप कहें? क्या सेवा कर सकता हूँ?
अरे नहीं-नहीं कुछ खास नहीं, बस अपना नाम नोमिनेट करवाना था। :)
(स्माईली पर विशेष ध्यान दिया जाये)
क्यों नहीं, आप तो वाक़ई इस साल के बेहतरीन चिट्ठाकार हैं.
जी शुक्रिया.
हा हा हा! कैसा शुक्रिया भाई? आप मेरा करो मैं आपका.... इस हाथ ले उस हाथ दे
जी जरूर. अब आज्ञा दें कुछ जरूरी काम है, बाद में बात करते हैं.
हाँ, मुझे भी.
अब दोनों को ही क्या जरूरी काम है यह तो हम सब जानते है और वो दोनो भी, इसलिए बिना इसमें उलझे हम आगे बढ़ते हैं, मान लीजिये यदि यही गुहार सभी चिट्ठाकार अपनी-अपनी शैली में लगाये तो कैसे लगायेंगे -
सबसे पहले गुरूदेव (इसे वो अपनी पोस्ट में जगह नहीं दे पाए थे, उनकी डस्टबिन में से उठाकर लाया हूँ)
तरकश पर जा कर नोमिनेट हमको कीजिये
बदले में १०० मुँण्डलियाँ अपने नाम कीजिये
अपने नाम कीजिये और छापिये जहाँ चाहे दिल
पर बेस्ट चिट्ठाकार का पुरस्कार जाये मुझे मिल
कहे "समीर" कि जो भी करेगा मुझे नोमिनेट
सभी गृह-नक्षत्र और कुण्डली मुफ़्त करूँगा सेट
यह मुण्डली उनकी डस्टबिन में से उठाकर ज्योंही में निकलने लगा, मेरी उनके नज़र कम्प्यूटर पर पड़ी तो इसका भाग -2 (सुधरा हुआ रूप) भी कॉपी कर लाया -
नामिनेट हमको करे, जो तरकश पर जाय
१०० मुण्डलियों की गड्डी, अपने नाम कराय
अपने नाम कराय फिर छापो अपने चिट्ठे पर
हमको चिट्ठाकार कहे, आप हों अबसे कविवर
कहे समीर कि बस जितवा दो हमको आप
कुण्ड़लियां तुम पर लिखूँ, गृह-नक्षत्र दूँ नाप
अब यदि यही चस्का अपने दस्तक वाले नाहर भाई साहब को लग जाए तो -
- घोषणा -
यदि किसी भी कारणवश या अकारणवश यह पुरस्कार हमें नहीं मिला तो हम अपने पूर्ण होशोहवास में यह घोषणा करते है कि चिट्ठाजगत से सन्यास ले लिया जायेगा. कृपया हमें मजबूर ना करें।
(अब यह तो सभी जानते है कि वो आजकल लिखता ही कितने है. :) खैर स्माईली लगा दी है)
अब बात की जाए अपने श्रीश भाई साहब, मतलब ई-पंडितजी की -
आज की इस क्लाश में मैं आपको सिखाऊँगा कि तरकश पर 2006 के सर्वश्रेष्ठ चिट्ठाकार को नोमिनेट कैसे करें -
1. सबसे पहले अपना ई-मेल अकाउण्ट खोले.
2. अब To वाले टेक्सट बॉक्स में contact@tarakash.com लिखें
3. subject में "2006 के सर्वश्रेष्ठ चिट्ठाकार के लिए नोमिनेशन" लिखें
4. body वाले भाग में यह लिखें -
मैं 2006 के सर्वश्रेष्ठ चिट्ठाकार के रूप में इन दो चिट्ठाकारों को नोमिनेट करता हूँ -
1. श्रीश
2. ई-पंडित
और send पर क्लिक कर दें, आपका काम हो जायेगा.
अब मिलिये अपने हास्य मंत्री उर्फ़ वकील बाबू उर्फ़ भुवनेश शर्मा से -
पैंदीलालजी अपनी मस्ती में टहल रहे थे। हमने समझाया मत टहलिये, आज न्यायपालिका धड़ाधड़ फैसले सुना रही है और आप अकारण टहल रहें है और वो भी मस्ती में! आप पर जानबुझकर मस्ती में टहलने और अपना समय नष्ट कर भारत के समुचित विकास में बाधा पँहुचाने का मुकदमा चलाया जा सकता है। हमारा इतना कहना ही था कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हमारी बात मान लेते तो शायद...
(अरे भाई बेचारे को समय ही कहाँ मिला था. :) स्माईली लगा दी है)
खेर सुना है आजकल 2006 के सर्वश्रेष्ठ चिट्ठाकार के लिए नोमिनेशन हो रहा है, अब चुँकि हम खुद तो अपना नाम नोमिनेट नहीं कर सकते, इसलिए बंधुजनों से निवेदन है कि हमारा नाम भेज दें. कहीं ऐसा न हो कि पैंदीलालजी की तरह ...
शैलेश भारतवासी जी -
प्रिय
तुम जो मुझे देख रही हो
शर्माकर आँखे मूदें
मैं भी तो अधीर हूँ
बहुत कठिन तो नहीं
तुम दूर भी नहीं
मगर प्रिये
कौन सुनेगा मुझे
कौन समझेगा इसे
तुम मुझे मिलो
या ना मिलो
मैं हमेशा तुम्हारा हूँ
और तुम मेरी
अनंतकाल तक ...
(अब यहाँ शैलेशजी किस प्रिय की बात कर रहें है, यह बताने की आवश्यकता नहीं लगती. :) स्माईली लगा दी है)
प्रमेंन्द्र प्रताप सिंह उर्फ़ महाशक्तिजी -
मैं जानता हूँ
तुम नहीं मिलोगी मुझे
मर कर भी नहीं
मगर
मैं मरना नहीं चाहता
पाना चाहता हूँ
जीते जी तुमको
कहो क्या करूँ
कैसे मरूँ? (विशेष ध्यान दें, :) स्माईली लगा दी है)
क्या कोई नहीं
जो पँहुचा सके मेरा संदेश
और तुम चली आओ मेरे पास...
(क्यों भाई तुम खुद काहे नहीं चले जाते. नोट : स्माईली उपर देखें)
और भी बहुत सारे मित्रगण है जिनके ख्यालात लिखने का मन हो रहा है मगर क्या है कि पता ही नहीं चल रहा कि किसने कब ब्लॉग लिखना शुरू किया. सभी जगह चक्कर लगा आये मगर जवाब मिला कि एक-एक ब्लॉग खोलो और उनके Archive में जाकर देखो। ( :( स्माईली नोट करें)
भेज दो नाम
कर दो नोमिनेट
मिलके सारे
जीतेगा कौन?
शत शत नमन
लगाओ नारा
सबसे अच्छा
शत शत नमन
सबसे प्यारा
अरे अनुरागजी आप कहाँ रह गये थे. मेरे लिए इतने सुन्दर हाइकु लिखने के लिए शुक्रिया. (नोट : स्माईली नहीं हैं)
अंत मैं आप सभी से निवेदन है कि अनुरागजी की पगडंडी पर चलकर उनका दिल अवश्य रखें, आखिर पहली बार वो आपसे कुछ करने के लिए कह रहें है।
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Wednesday, December 20, 2006 |


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