पाँच हाइकु

Wednesday, January 31, 2007 |

चैन से लेटा
बर्फ़ की चादर में
नदी का पानी

 

बैठा सूरज
कोहरे की आड़ में
आँच सेंकता

 

राह अकेली
कोहरे में छुपी है
डरी-डरी सी

 

भंवरा उदास
कहाँ गई बगिया
मॉल खड़ा है

 

सजा सिन्दूर
बन रही दुल्हन
ओस की बूँद

1 comments:

प्रशांत मलिक said...

भंवरा उदास
कहाँ गई बगिया
मॉल खड़ा है
kya baat hai