चैन से लेटा
बर्फ़ की चादर में
नदी का पानी
बैठा सूरज
कोहरे की आड़ में
आँच सेंकता
राह अकेली
कोहरे में छुपी है
डरी-डरी सी
भंवरा उदास
कहाँ गई बगिया
मॉल खड़ा है
सजा सिन्दूर
बन रही दुल्हन
ओस की बूँद
Giriraj's Personal Blog
Wednesday, January 31, 2007 |
Posted by
गिरिराज जोशी
चैन से लेटा
बर्फ़ की चादर में
नदी का पानी
बैठा सूरज
कोहरे की आड़ में
आँच सेंकता
राह अकेली
कोहरे में छुपी है
डरी-डरी सी
भंवरा उदास
कहाँ गई बगिया
मॉल खड़ा है
सजा सिन्दूर
बन रही दुल्हन
ओस की बूँद
Labels:
हाइकु

1 comments:
भंवरा उदास
कहाँ गई बगिया
मॉल खड़ा है
kya baat hai
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