चंद बाते हँसकर जो कर ली उनके साथ,
वे पूछ बैठे, "जानू, कब कर रहे हो शादी?"
हम करने लेगें है खुलकर दिल की बात
शर्माना छोड़ो तुम भी, तो कुछ बात बनें
फूल नहीं, मेरी मोहब्बत के चिथड़े थे,
बरसे जो तुझ पर तेरे निकाह की रात
मुझसे पूछे बगैर तुम कुछ भी न करती थी,
फिर कैसे कर ली तुमने ये शादी अचानक?
आपको देखते ही आ जाती है चेहरे पर मुस्कान,
तुम पूछते हो, "पागल हूँ क्या?, हँसते क्यूँ हो?"
तुम्हारी यही अदा मुझे लुभाती है,
कितना भी हो ग़म, तू मुस्काती है
कुछ ना कहो, वो हसीं मंजर आया है,
बहका हूँ मैं, मुझे डूब जाने दो आज
सूखा पड़ा था यहाँ जाने कब से,
तुम मुस्काये हो या बादल बरसे?
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Thursday, April 26, 2007 |


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