आपने अच्छा लिखा है ... मगर आप एक जगह चूक गये, अच्छी पड़ताल नहीं की। आपने यह देखा कि “हिन्द-युग्म” 1000 से अधिक दैनिक पाठक होने का दावा करता है, आपने शैलेश से बात की ओर उसे समझने की कोशिश भी की, अच्छी बात है! मगर यदि आप हिन्द-युग्म के गोदाम में एक नज़र मार आते तो शायद आपको सब समझ आ जाता.... खेर, अब समझ लिजिये।
हिन्द-युग्म की शुरूवात अवश्य कुछ कवि मित्रों के एक मंच पर आने से हुई थी मगर आप इसे मात्र काव्य-ब्लॉग कहकर यदि यह गणना करने बैठ जायेंगे कि प्रतिदिन 1000 से ज्यादा काव्य-प्रेमी कहाँ से आ रहे है! तो आपका शौध गलत परिणाम ही देगा।
अंतर्जाल पर हिन्द-युग्म एक सम्पूर्ण कला मंच है, आप इसे कला के लिये एक ऑनलाईन प्रयोगशाला भी कह सकते हैं... जहाँ के कलाकार अपनी कला में दिन-ब-दिन निखार ला रहें है, अपनी कला को दूसरे कलाकारों के साथ बांट रहें है, साझा प्रयास कर रहे हैं, एक दूसरे के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं, नये आयाम स्थापित कर रहे हैं। यह हिन्द-युग्म का ऑनलाईन स्वरूप है...इससे अलग हिन्द-युग्म ऑफलाईन साहित्य के साथ-साथ सामाजिक कार्य भी कर रहा है... इसका उद्देश्य हिन्दी, हिन्दुस्तान एवं कला को संवारना है... इसके लिये प्रयासरत भी है।
हिन्द-युग्म को पहले समझिये, फिर लिखिये, पढ़ने वालों को भी ज्यादा मज़ा आयेगा... हिन्द-युग्म का ऑनलाईन काम तो सारा आपके सामने पढ़ने के लिये उपलब्ध है ही... ऑफलाईन कार्य भी बहुत कुछ उपलब्ध है.. बाकि जल्द ही ऑनलाईन उपलब्ध हो जायेगा... बस आपको समय निकालकर पढ़ना होगा... समझना होगा।
मसिजीवी भाई! पहले “हिन्द-युग्म” को समझिये
Monday, February 11, 2008 |
Posted by
गिरिराज जोशी
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4 comments:
शुक्रिया।। पढ़ने के लिए
कोई दावा नहीं कि पूर्ण विवेचन है... हालांकि इन गतिविधियों पर विचार किया गया था। तथापि हिन्दयुग्म को जो बात मुझे विशेष प्रशंसनीय लगी मैंने उसका ही उल्लेख किया।
शैलेश का मत था कि 90प्रतिशत पाठक कविता पर ही आते हैं अत: उस पर ध्यान केंद्रित किया
हिन्दी,हिन्दू,हिन्दुस्तान?
अफलातून जी, हिन्दू नहीं हिंदुस्तान कहिये, ये समस्त हिंद का युग्म है, हिंदी जहाँ की राष्ट्रभाषा है
मसिजीवी जी,
हम धीरे-धीरे सभी विधाओं में पैर पसारना चाहते हैं, हाँ लेकिन धीरे-धीरे :)
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